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Hindi

Quick Revision

Chapter 6: Yeh Danturhit Muskaan

Key Concepts

  • 1'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • 2'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • 3'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • 4'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • 5'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • 6'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • 7'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • 8'यह दंतुरित मुसकान' में शिशु की मुस्कान का क्या प्रभाव बताया गया है?

Important Formulas & Facts

#1

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

#2

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

#3

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

#4

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

#5

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

#6

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

#7

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

#8

नागार्जुन कहते हैं शिशु की दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुस्कान इतनी शक्तिशाली है कि: (1) मुरझाई कली भी खिल उठे। (2) ठंडी राख में आग जल उठे। (3) पत्थर पिघल जाए। शिशु = आशा, भविष्य, निर्दोषता। बिंब: कमल, चंद्र, शेफालिका।

Must-Know Questions

Q1'यह दंतुरित मुसकान' कविता के कवि कौन हैं?
Explanation

'यह दंतुरित मुसकान' कविता नागार्जुन द्वारा रचित है। नागार्जुन को 'जनकवि' के नाम से जाना जाता है।

Q2'दंतुरित मुसकान' का क्या अर्थ है?
Explanation

'दंतुरित मुसकान' का अर्थ है — वह मुस्कान जिसमें नए-नए निकले छोटे-छोटे दाँत दिखाई दें। यह शिशु की मुस्कान है जब उसके दूध के दाँत आ रहे होते हैं।

Q3कवि ने शिशु की मुस्कान की तुलना किससे की है?
Explanation

कवि ने शिशु की मुस्कान की तुलना कमल के फूल से की है। जैसे कीचड़ में कमल खिलता है, वैसे ही बदहाली में भी शिशु की मुस्कान खिलती है।

Q4शिशु की मुस्कान कवि को क्या प्रभाव डालती है?
Explanation

शिशु की मुस्कान कवि के कठोर और निराश मन को पिघला देती है। मृतक में भी प्राण फूँक देने की शक्ति है इस मुस्कान में।

Q5कवि ने 'बाँस या बबूल' का प्रयोग किस अर्थ में किया है?
Explanation

कवि ने 'बाँस या बबूल' का प्रयोग कठोर और रूखे व्यक्तियों के लिए किया है। जैसे बाँस और बबूल कठोर पेड़ हैं, वैसे ही कठोर हृदय के लोग भी शिशु की मुस्कान से पिघल जाते हैं।

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