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Hindi

Quick Revision

Chapter 12: Lakhnavi Andaaz

Key Concepts

  • 1'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?
  • 2'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?
  • 3'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?
  • 4'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?
  • 5'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?
  • 6'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?
  • 7'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?
  • 8'लखनवी अंदाज़' पाठ का मूल भाव क्या है?

Important Formulas & Facts

#1

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

#2

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

#3

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

#4

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

#5

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

#6

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

#7

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

#8

यशपाल: नवाब साहब ने खीरा काटा, सूँघा, बिना खाए फेंक दिया — दिखावे की शान। लखनऊ की बनावटी नज़ाकत पर व्यंग्य। संदेश: (1) दिखावा = खोखलापन। (2) असली शिष्टाचार vs बनावटी तहज़ीब। (3) सामंती मानसिकता अब अप्रासंगिक।

Must-Know Questions

Q1नवाब साहब ने खीरे का क्या किया? इससे उनके चरित्र की क्या विशेषता प्रकट होती है?
Explanation

नवाब साहब ने: (1) खीरे को धोया, छीला, काटा। (2) नमक-मिर्च लगाई। (3) एक-एक टुकड़ा उठाकर सूँघा। (4) फिर बिना खाए खिड़की से बाहर फेंक दिया! यह दर्शाता है: (1) नवाबी शान-शौकत — खाना भी शान से। (2) दिखावे की संस्कृति — भूखे हैं पर सामने खा नहीं सकते। (3) बनावटीपन — सहयात्री के सामने 'तरीके' दिखाना। (4) लखनऊ की नज़ाकत — हर काम में अदब-कायदा। (5) व्यंग्य — बेकार की शान के लिए खाना बर्बाद करना।

Q2लखनवी अंदाज़ पाठ में लेखक ने किस पर व्यंग्य किया है?
Explanation

लेखक यशपाल ने व्यंग्य किया है: (1) नवाबी संस्कृति के खोखलेपन पर — दिखावे की शान, पर अंदर से खोखले। (2) बनावटी तहज़ीब पर — भूखे हैं लेकिन खा नहीं सकते। (3) पुरानी सामंती मानसिकता पर — आधुनिक दौर में भी रईसी का ढोंग। (4) खान-पान से जुड़ी अनावश्यक नज़ाकत पर — एक साधारण खीरा खाने में इतना नाटक।

Q3'लखनवी अंदाज़' पाठ का उद्देश्य क्या है?
Explanation

पाठ का उद्देश्य: (1) नवाबी संस्कृति के दिखावे पर व्यंग्य करना। (2) दिखाना कि बनावटी शिष्टाचार कैसे बेतुके हो सकते हैं। (3) सामंती मानसिकता की आलोचना। (4) सादगी बनाम दिखावे का अंतर दर्शाना।

Q4नवाब साहब ने लेखक को खीरा खाने का निमंत्रण क्यों दिया और लेखक ने मना क्यों किया?
Explanation

नवाब साहब ने शिष्टाचार और लखनवी तहज़ीब के कारण निमंत्रण दिया — पहले मना करो, फिर ज़ोर देने पर स्वीकारो — यह लखनऊ की रवायत है। लेखक ने मना किया क्योंकि: (1) वह समझ गए कि यह औपचारिक निमंत्रण है। (2) स्वीकार करने पर नवाब साहब असहज होते। (3) बनावटी शिष्टाचार में भाग नहीं लेना चाहते थे।

Practice Lakhnavi Andaaz

Reinforce what you just revised with practice questions