Key Concepts
- 1'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
- 2'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
- 3'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
- 4'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
- 5'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
- 6'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
- 7'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
- 8'संगतकार' कविता में संगतकार की क्या भूमिका बताई गई है?
Important Formulas & Facts
मंगलेश डबराल: संगतकार = सहायक, जो मुख्य गायक का साथ देता है। विशेषताएँ: (1) सचेत रूप से आवाज़ नीची रखता है। (2) मुख्य गायक को गिरने नहीं देता। (3) पीछे खड़ा रहकर भी ज़रूरी। प्रतीक: समाज के वे लोग जो बिना प्रसिद्धि के दूसरों का सहारा बनते हैं — शिक्षक, माता-पिता, कार्यकर्ता।
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Must-Know Questions
Q1'संगतकार' कविता के रचयिता कौन हैं?
'संगतकार' कविता मंगलेश डबराल द्वारा रचित है। वे समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि हैं।
Q2'संगतकार' किसे कहते हैं?
संगतकार वह गायक होता है जो मुख्य गायक का साथ देता है। वह मुख्य गायक की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाता है और गायन को और प्रभावी बनाता है।
Q3संगतकार अपनी आवाज़ को ऊँचा क्यों नहीं करता?
संगतकार जानबूझकर अपनी आवाज़ ऊँची नहीं करता ताकि मुख्य गायक की आवाज़ दबे नहीं। यह उसकी विनम्रता, त्याग और सहयोग की भावना है — वह मुख्य गायक को चमकाने के लिए स्वयं पीछे रहता है।
Q4कवि ने संगतकार को किसका प्रतीक माना है?
कवि ने संगतकार को समाज के उन गुमनाम लोगों का प्रतीक माना है जो दूसरों की सफलता में अपना योगदान देते हैं लेकिन स्वयं पहचान नहीं पाते। वे बिना किसी मान-सम्मान की अपेक्षा के सहयोग करते हैं।
Q5संगतकार मुख्य गायक की कब सहायता करता है?
जब मुख्य गायक ऊँचे स्वर में गाते-गाते भटक जाता है या उसका स्वर लड़खड़ाता है, तब संगतकार अपनी आवाज़ से उसे सँभालता है और सही राह पर लाता है।
Practice Sangatkar
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